ग़ज़ल संग्रह 'तन्हा साया' की समीक्षा (critical appreciation of TANHA SAYA)

अपने ईमां को बेंच देगा क्या
हाथ में फिर तेरे बचेगा क्या।।
जिंदगी सौप दी जिसे हमने
साथ वह दो कदम चलेगा क्या।।

पुस्तक - 'तन्हा साया'
ग़ज़लकार- श्री Shailendra Chauhan 'शैल'
प्रकाशन-Poiesis-society for poetry
मूल्य - 275/-

समीक्षा द्वारा -Madan Mohan Upadhyay 'Mohan'

जैसे असीम समुद्र के झंझावातों में नौका चलाता हुआ नाविक; जैसे अनंत आकाश में तूफानों के बीच उड़ान भरता कोई विहग; अपने यात्रागत अनुभवों को अपने अंदर समेटे हो ऐसे ही #तन्हा_साया एक सम्पूर्ण सामाजिक-प्रशासनिक उतार-चढ़ाव के अनुभवों को अपने आप में समेटे है।
      यूं तो सब जिंदगी जी ही लेते हैं परंतु खुद्दारी के साथ संवेदनशील व्यक्तित्व वाले निराला अनुभव लिए हुए होते हैं और अगर वे इसको लिपिबद्ध करते हैं तो वह उनकी परिस्थितियों के साथ जी हुई जिंदगी का आईना होता है।
    शैलेन्द्र शैल जी का गजल-संग्रह आत्मपरक विषय-वस्तु के साथ है। शे'र की शेरियत यही होती है कि वह लाक्षणिकता लिए हुए हो, यह है भी ;परंतु मजे की बात यह है कि चूंकि गजलगो अन्य आत्मकथा लेखकों की तरह रिटायरमेंट के बाद अथवा जीवन के अवसान के समय अपने अनुभव साझा नहीं कर रहा है बल्कि वह अब भी कार्यरत है, तो बहुत कुछ सांकेतिक, लाक्षणिक और व्यंजना में स्वाभाविक ही कह गया है।

प्रस्तुत ग़ज़ल संग्रह में बेटियों की आवाज, नारी स्वर, एक जिम्मेदार व्यक्ति की जिम्मेदारी , अपनी मिट्टी-अपनी मातृभूमि की यादें, प्यार, रोमांस यहां तक कि एकतरफ़ा प्यार के किस्सों पर भी ग़ज़लगोई हुई है। आइए कुछ-एक बेहतरीन शे'रों के साथ पुस्तक की यात्रा करते हैं।

खुद्दारी और ईमानदारी पर भरोसा देखिए जहां व्यक्ति सिद्धांतों के रक्षार्थ अपना सर्वस्व निछावर कर दे।

वह जो ईमां के लिए हद से गुजर जाते हैं।
गर उठी उंगलियां किरदार पे मर जाते हैं।।

ठुकरा कर चला आया आया समंदर की ग़ुलामी।
चलता न उसूलों पर तो दरिया नहीं होता।।

जिंदगी भर लड़ा हो जो सच के लिए।
उसको परवाह कब जीत की हार की।।

व्यक्ति जब अपने कटु अनुभवों से निकलता है, जब उसको लगता है कि जो भी है अपने बलबूते ही है तब उसके अश्आर निकलते हैं कि-

 नहीं कूवत जमाने में उठा ले
 नजर से बस गिराना जानता है

व्यर्थ संवादों व्यर्थ परिचर्चा से कहीं दूर किसी लोक कल्याण की ओर-

 क्यों गंवाए कोई वक्त तकरार में।
 वज्ह भी तो मिले कोई तकरार की।।

इल्जाम ए बेवफाई क्यों सर किसी के आए।
किसको खबर यहां पर शायद वह बावफा हो।।

बढ़ता नहीं लिबासों से कद कभी किसी का
इन्सा वही बड़ा है दिल का भी जो बड़ा हो।।

किस तरीके से रिश्ते निभाए जाते हैं -

मोहब्बत को हम आजमाते नहीं हैं।
नजर से किसी को गिराते नहीं हैं।।
 हमें क्या खबर क्या मोहब्बत का हासिल।
गणित हमको रिश्तों में आते नहीं हैं।।

 देश प्रेम के अल्फ़ाज़ भी हैं-

 वतन के हिफाजत की जब बात आए।
 कभी पीठ अपनी दिखाते नहीं है।।

नारी सशक्तिकरण कन्या भ्रूण हत्या इस सब पर इतनी बात होती है परंतु बेटी पालने वाले की जिम्मेदारियां आज के समाज में किस तरीके की होती हैं; उस पर क्या बीतती है। एक शेर देखिएगा-

 नदारद चैन दिन का और रातों का सुकूं गायब
 उसे आए भी कैसे नींद बेटी जो सयानी है।।

कितना सुलझा हुआ संदेश है स्थिति प्रज्ञता की स्थिति है कि -
कहां अकेली आकर यह दस्तक देती।
खुशियों के संग दर्द पुराना भी होगा।।
यूं ही तो इतने मजबूत नहीं होते
 रिश्तो का कुछ तानाबाना भी होगा।।
कोरे जज्बातों से बनती बात नहीं
दिल में है गर प्यार जताना भी होगा।।

जिंदगी जीने की खातिर रोज मरता आदमी।
 प्यार से कटती फकत बातें हैं यह बेकार की।।

मोहब्बत के कुछ शे'र देखिए -

सदा के लिए मैं नजर में समा लूं
जरा पास आ आ दूर जाने से पहले
मोहब्बत में हारा हुआ जीतता है
कहां जान पाए हराने से पहले।।

 आजीविका के लिए व्यक्ति अपनी मिट्टी से दूर है परंतु उसकी यादें कहां भूल सकता है-

 हमारे गांव में एक प्यार की दुनिया समाती थी।
 पराए शहर में रिश्ते पुराने याद रहते हैं।।
बहुत दौलत कमा कर भी खुशी क्यों कर नहीं मिलती। मेरी मां के दिए वह चार आने याद रहते हैं।।

रात की नीरवता और अलसाई चांदनी में अगर एक शायर बैठा है तो कैसे शेर दिखेगा इन गंभीर शायरी के बीच में ऐसे लम्हे प्रस्तुत गजल संग्रह में छूटे नहीं है नहीं है -

अपने पहलू में बुलाना तो तो खबर कर देना।
 बिजलियां फिर से गिराना तो खबर कर देना।।

 कुछ मोहब्बत में सवालात भी पेश आएंगे ।
तुझको सूझे ना बहाना तो खबर कर देना ।।

है ना इनकार बिखरने से सितमगर मुझको ।
सोए जज्बात जगाना तो खबर कर देना।।

 संपूर्ण रूप से प्रस्तुत गजल संग्रह तन्हा साया अपने आप में समाज के सभी चेहरों को लिए हुए संपूर्ण है।इसमें व्यक्ति के अनुभव हैं, मोहब्बत के अल्फाज है, भाषा की सौष्ठवता है, व्याकरण पर ग़ज़लगो की पकड़ है।सुंदर शिल्प है। समाज के बाकी तबके के लोगों को तो यह गजल संग्रह पढ़ना ही चाहिए ही चाहिए लेकिन यह मेरी व्यक्तिगत राय है कि जो समाज से संघर्ष कर रहे हैं, जो विद्यार्थी वर्ग है, जो कर्मचारी वर्ग है उसके लिए कहीं ना कहीं इसके एक एक शेर में मोटिवेशन है, कोटेशन है। जहां पर लोग बड़े विचारकों की पंक्तियां अपने बेडरूम में में ड्राइंग रूम में स्टडी टेबल के पास लगाते हैं कहीं ना कहीं तन्हा साया भी ऐसे ही जगह पर ही स्थान पाती है। यह अलग की बात है कि लेखक इतना ज्यादा मार्केटिंग नहीं करता है तो बहुत सारे लोगों ने उसके बारे में नहीं सुना होगा लेकिन यह सोना है जिसको चमकना ही चाहिए ।।

https://mohanfuturestar.blogspot.com/p/critical-appreciation-of-tanha-saya.html?m=1

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