कहानी : एक मुहब्बत ऐसी भी
रुचि और श्रीजेश कब दोस्त से प्रेमी बन गए यह बात केवल क्लास को पता लगी उन्हें नहीं। प्यार और होटल के बर्तन जाति और समाज नहीं देखते। यही इन लोगों के प्यार के साथ था। परंतु इन दोनों के बीच अनोखा समझौता था कि 'प्यार कोई शारीरिक संबंधों का खेल नहीं है और विवाह उसकी उपलब्धि नहीं। '
अतः बेइंतहा मोहब्बत करने वाले दोनों प्रेमी अपने सामाजिक ताने-बाने को तोड़ना नहीं चाहते थे।
आज कालेज का आखिरी दिन था। दोनों के चेहरे पर अलग होने का गम तो था मगर उनको छिपाए हुए थे। लंच में दोनों सधे कदमों से उसी घास के मैदान में पहुंचे। अपनी बात शुरू करते हुए श्रीजेश ने बताया कि वह इसी शहर में एक क्लीनिक खोलेगा और मेडिकल की तैयारी करेगा।
- '' और मैं.... मेरी शादी होने वाली है... खैर इसी शहर से होगी। शादी करने के बाद पढ़ाई जारी रखूंगी। रेसेस ओवर हो चुका था। श्रीजेश में क्लास में रुचि के सामने बैठने की हिम्मत न हो रही थी। वह सरदर्द का बहाना लेकर हास्टल चला गया। रुचि भी सीट पर सिर रखे उस दिन का समय बिता गयी।
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रूचि की शादी को दो महीने हो चुके हैं। वह अपने ससुराल में खुश है और श्रीजेश भी अपनी क्लीनिक में। मैसेजेज से बात हो जाती है दो-चार टूक। दोनों की खुशी के लिए इतना ही चाहिए भी था।
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आज रात 11 बजे के आसपास श्रीजेश के फोन पर रुचि का मैसेज आया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है चूंकि श्रीजेश ने अपने पढने का इंतजाम अपनी क्लीनिक में ही बना रखा था अतः क्लीनिक देर रात तक खुली रहती थी। मैसेज देखते ही उसको इतना भी याद न रहा कि उसे किसी ने बुलाया नहीं है, दुकान खुली छोड़कर अपने मेडिकल बैग के साथ वह रुचि की ससुराल की ओर भागा वहां पहुंचकर उसने उसको ट्रीटमेंट दिया। जब वह इलाज कर रहा था उस समय रुचि के घर वाले कानाफूसी कर रहे थे। कानाफूसी इस बात पर थी कि डॉक्टर को बुलाया किसने और हमलोंगों से ज्यादा परेशानी उसके चेहरे पर क्यों है। इलाज के बाद श्रीजेश के चेहरे पर संतुष्टि के भाव दिखे पर इसके बाद प्रश्नोत्तरी शुरू हुई। चूंकि श्रीजेश इस सबके लिए तैयार नहीं था अतः फंसता नजर आया इसके बाद उसकी काफी बेइज्जती की गई और उधर न दिखाई पड़ने आदि के तमाम नियम कायदे बता कर भगा दिया गया।
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रुचि कुछ न बोल पाने की स्थिति में आंखों से अश्रु धारा छोड़ती हुई लेटी रही।
श्रीजेश उसको किस्मत की लेखी मानकर टाल गया। पर रुचि को श्रीजेश का यह अपमान कचोट रहा था... बहुत ज्यादा कचोट रहा था।
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इस घटना को दो-तीन दिन बीत गए थे। घर में सबको पता था कि रुचि किचेन में खाना पका रही है, तभी किचेन में कुछ बर्तन और भारी भरकम चीज गिरने की आवाज आई। सब लोग भागकर किचेन पहुंचे तो देखा रुची बदहवास गिरी पड़ी है। उसका हाथ धारदार थाली के ऊपर है जहां से बहुत सारा खून बह चुका है।
अब इतनी रात मेडिकल के नाम पर केवल श्रीजेश की क्लीनिक खुली रह सकती है, घर के दो-तीन सदस्य भागते - भागते श्रीजेश के पास पहुंचे और सीधे पैरों में गिरकर अनुनय-विनय करने लगे। मोमबत्ती के उजाले में जब उसने देखा कि ये रुचि के घरवाले हैं तो उसके मानों पर लग गए। उसके चेहरे पर जितनी ज्यादा घबराहट थी पैरों में उतनी ही फुर्ती। वह बहुत तेज भागता हुआ सीधे किचेन पहुंचा। उसने रुचि की कलाई पकड़ी पर...... यह क्या..... उसकी कलाई में वह गर्मी नहीं थी। बदहवासी में उसने इधर-उधर देखा.... किचन की टाइल्स पर एक ब्लेड रखी थी जिसकी धार पर लगा खून सूख गया था। उसने चुपके से ब्लेड उठा लिया और 'ऐम साॅरी' बोलते हुए बोझिल कदमों से घर से बाहर चला आया और क्लीनिक के रास्ते पर चल दिया।
सुबह सड़क पर एक युवक की लाश पड़ी थी जिसके आसपास खड़े लोगों में आधे बोल रहे थे 'सुसाइड है' और आधे बोल रहे थे ट्रक ने कुचल दिया यानी 'एक्सीडेंट'।
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