हमसफर कैसे कैसे #3

#हमसफर_कैसे_कैसे #3
और कोई वक्त होता तो इतनी देर रात का सोया अमिताभ सुबह अपनी नींद पूरी करके ही उठता, परंतु आज उसकी नींद कम ही समय में पूरी हो गई। जमकर स्नान किया; वही पोमिग्रेनेट वाली शर्ट पहनी और बैग टांग कर घर से निकल लिया। मम्मी ने पूंछा तो जरूर कि आज डेढ़ घंटे पहले ही क्यों जा रहा है तो उसने आफिस में ज्यादा काम होने का बहाना बताया।
   यह क्या आज तो खिड़की वाली सीट खाली थी, उसके चेहरे का रंग एकदम फीका पड़ गया। उसने थोड़ा और ताकझाक करने की कोशिश की परंतु प्रेरणा कहीं नहीं दिखी, अचानक उसका ध्यान बाउंड्री वाल के अंदर गया तो वहां पर प्रेरणा किसी एक और लड़की के साथ खड़ी उसको देख कर कर मुस्कुरा रही थी। यूं लगा जैसे वह छुपकर देखना चाहती हो कि खिड़की पर उसे न पाकर पाकर अमिताभ का चेहरा कैसे बनता है।
  बगल में खड़ी लड़की स्नेहा थी वह भी गौर से अमिताभ को देख रही थी और प्रेरणा जो कुछ उसे बता रही थी कान उसकी तरफ किए हुए सुन रही थी।
 सब कुछ ठीक-ठाक चल ठीक-ठाक चल चल रहा था अमिताभ और प्रेरणा रात में चैटिंग करते और ऑफिस जाते वक्त दोनों का दीदार भी हो जाया करता परंतु अमिताभ ने कुछ दिनों बाद यह नोटिस किया कि जहां उनकी सामान्य चैटिंग को प्रेम वार्ता में परवान चढ़ना चाहिए वहां ऐसा नहीं हो रहा है, शायद प्रेरणा उससे सामान्य से ज्यादा बात नहीं करना चाहती।
 यहां तक कि वह खिड़की के पास न बैठने और फील्ड में न आने का कारण पूछने पर कोई जवाब भी नहीं देती। अमिताभ, जिसको कि प्रेरणा से मिलने की यूं तो कोई जल्दबाजी नहीं थी वह एक-एक लम्हों को हौले-हौले से जीना चाहता था, परंतु अब बेचैनी वश उसने मिलने का समय मांगा। प्रेरणा ने बड़ी चालाकी से अपनी असमर्थता जाहिर कर दी तो अमिताभ ने फोन पर बात करना चाहा और और फोन नंबर मांगा। पहले तो उसने न-नुकुर की, ज्यादा कहने पर उसने थोड़ी देर में खुद कॉल करने को बोला।
   करीब-करीब दस मिनट बाद एक अननोन नंबर से कॉल आई उधर से प्रेरणा थी। औपचारिक बातें होने के बाद जब अमिताभ ने उसकी उदासीनता का कारण पूछा तो उसने कहा की ऐसी कोई बात नहीं है, बात आगे बढ़ाते हुए प्रेरणा ने कहा की वह अमिताभ को केवल एक अच्छा दोस्त मानती है इससे आगे न तो वह कुछ सोचती है और ना ही सोचना चाहती है। अमिताभ को यूं लगा कि जैसे आसमान की सबसे ऊंचाई पर उड़ता हुआ वह ऐसा परिंदा है जिसके यकायक पर काट दिए गए हों। वैसे तो अब अमिताभ के पास इसका कोई प्रत्युत्तर ना था तो उसने कुछ और इधर-उधर की बातें की और फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। मन नहीं माना तो थोड़ी देर बाद फिर से ट्राई किया पता चला फोन ऑफ जा रहा रहा है जा रहा रहा है जाहिर था कि उससे एक नई सिम से बात की गई थी।
तथाकथित प्यार से पेट भर चुके लड़के लड़कियों के बारे में जैसी मनगढ़ंत कहानियां बताते हैं उन कहानियों पर अमिताभ को और ज्यादा भरोसा होने लगा था उसे एक तरीके की चिढ़न होने लगी थी।
 प्रेरणा का रहस्यमई तरीके से यू टर्न लेना अमिताभ के समझ में नहीं आ रहा था। वह कारण जानना चाहता था ;वह बात करना चाहता था परंतु बाकी सभी विषयों पर बात करती हुई प्रेरणा इस विषय का जिक्र होते ही या तो रिप्लाई नहीं देती या तुरंत ऑफलाइन हो जाती। स्कूल का मिलना मिलाना तो कब का बंद हो चुका था।
 अब अमिताभ की प्रेरणा को लेकर प्रेम के सपने देखने की जिजीविषा रही हो या ना रही हो लेकिन इस अनमनेपन का राज जानने को आतुर था; परंतु जाने कैसे?

क्रमशः

✍️ मोहन

Comments

Popular posts from this blog

हास्य-व्यंग्य कहानी : दादा की आफ्टर मैरिज गर्लफ्रेंड

विभीषण

ट्यूशन