हास्य व्यंग्य : वह स्त्री है।
महाभारत का रण चल रहा था। अर्जुन जब कर्ण के रथ पर बाण मारता तो कर्ण का रथ कोशों दूर पीछे चला जाता, और जब कर्ण अर्जुन के रथ पर बाण मारता तो अर्जुन का रथ कुछ ही कदम पीछे खिसकता, परंतु कृष्ण हर बार कर्ण की ही तारीफ करते।
अर्जुन से रहा न गया तो बोल पड़ा, 'हे माधव! यह क्या! मैं मारता हूं तो कर्ण का रथ इतनी दूर जाता है और कर्ण के मारने पर मेरा रथ दो-चार कदम ही पीछे खिसकता है तब भी आप कर्ण की ही तारीफ कर रहे हैं।' श्री कृष्ण ने कहा, 'अर्जुन तुम्हारे रथ पर हनुमान जी, यहां तक कि स्वयं मैं विराजमान हूँ। वह तुम्हारे साथ हम सब से भी संघर्ष कर रहा है तब भी वह तुम्हारे रथ को इतना पीछे करने में कामयाब है। सोचो अगर हम लोग तुम्हारे रथ पर ना होते तो तुम्हारा क्या हाल होता।
यह प्रसंग सुनाने का उद्देश्य था की महिलाओं की पोस्ट पर ज्यादा लाइक कमेंट आने का लोड ना लें। #वह_स्त्री_है।
अर्जुन से रहा न गया तो बोल पड़ा, 'हे माधव! यह क्या! मैं मारता हूं तो कर्ण का रथ इतनी दूर जाता है और कर्ण के मारने पर मेरा रथ दो-चार कदम ही पीछे खिसकता है तब भी आप कर्ण की ही तारीफ कर रहे हैं।' श्री कृष्ण ने कहा, 'अर्जुन तुम्हारे रथ पर हनुमान जी, यहां तक कि स्वयं मैं विराजमान हूँ। वह तुम्हारे साथ हम सब से भी संघर्ष कर रहा है तब भी वह तुम्हारे रथ को इतना पीछे करने में कामयाब है। सोचो अगर हम लोग तुम्हारे रथ पर ना होते तो तुम्हारा क्या हाल होता।
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