कहानी :हमसफर कैसे कैसे भाग 5
कहानी :हमसफर कैसे कैसे भाग 5
अगले दिन अमिताभ ने कुछ सोच समझकर अपनी बैंगनी वाली शर्ट पहनी और कई दिन से छोड़े हुए स्कूल वाले रास्ते से ऑफिस की तरफ निकल पड़ा। इस बार उसकी चंचल नजरों ने ने खिड़की से लेकर फील्ड का चक्कर सेकेंड्स में लगा लिया। स्नेहा फील्ड में खड़ी थी। दोनों की नजरें मिली, दोनों मुस्कुराए और अमिताभ ऑफिस चला गया।
शाम को उसके फोन पर स्नेहा का मैसेज आया-
'बड़े स्मार्ट लग रहे थे।'
-' देखने वाले की नजरों का कमाल है।' अमिताभ ने एकदम मंझे हुए आशिकों जैसा उत्तर दिया।
ऐसा जवाब सुनकर स्नेहा की आंखें चमक गयीं।
बातों के बीच में स्नेहा ने अमिताभ को बताया कि प्रेरणा इन दोनों के बारे में अभी कुछ नहीं जानती और स्नेहा जानने भी नहीं देना चाहती। स्नेहा कहती है कि प्रेरणा उसकी अच्छी दोस्त है और वह अब भी अमिताभ की तारीफ करती है, अमिताभ को उससे एक अच्छे दोस्त के रूप में बात करनी चाहिए परंतु वह न तो मयंक से उसके संबंधों के बारे में बात करे और न ही अपने व स्नेहा के।
दोनों की बातें ऐसे ही चलती रहीं रहीं चलती रहीं रहीं कि कब दोनों एक दूसरे को समझने को समझने दूसरे को समझने को समझने लगे और बातें आप से तुम पर आ तुम पर आ गईं कि पता ही नहीं चला।
अमिताभ ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को 'बिजनेस सेटिंग' पर कर रखा था जिससे उसका कांटैक्ट दिख रहा था। स्नेहा ने पूछा-' यह तुम्हारा नंबर है?'
-'क्या पता!काॅल कर के देख लो।'
स्नेहा ने नंबर डायल कर दिया। बेल बजती रही, अमिताभ ने जानबूझकर फोन नहीं उठाया।
स्नेहा को भय मिश्रित आश्चर्य हुआ -'आपपर फोन नहीं आया?'
-'नहीं तो।'
-'अरे! फिर ये किसका नंबर है? कहाँ काॅल चली गई, सच-सच क्यों नहीं बता रहे?'
अमिताभ ने एक स्माइली और काॅल लॉग का स्क्रीनशॉट भेजा और फिर दोनों की लाफिंग रिएक्शन का गवाह उनका चैट बाक्स बना।
-'ये मेरा कॉलिंग और व्हाट्सएप नंबर दोनों है।'
अमिताभ को स्नेहा बहुत सुंदर लगती थी, इतनी जल्दी और इस अंदाज में अपना नंबर देने के साथ ही व्हाट्सएप से लेकर काॅलिंग तक की परमीशन मिलने पर अमिताभ के खुशी का ठिकाना न रहा।
फोन काल पर बात करके अमिताभ ने पहली बार स्नेहा की आवाज सुनी। क्या सुरीली आवाज थी!!
मैसेजिंग इंस्टाग्राम के बजाय व्हाट्सएप पर होने लगी थी और एक समय आया जब स्नेहा ने वीडियो काॅल करने को बोला, अमिताभ खुशी के मारे उछल पड़ा।
रात के 12 बजे फेशवाश लगाकर मुंह धुला (मोदी जी के पसीने वाला नुस्खा उस टाइम पब्लिक नहीं था।) और फिर आकर वीडियो काॅलिंग पर लग गया। और फिर यह क्रियाकलाप दैनिक हो गया।
दोनों की लंबी वीडियो चैटिंग चलती नेहा कभी अमिताभ को अपने टेडी परिचय कराती तो कभी अपने छोटे से भतीजे से। उसने अपने परिवार के बारे में भी उसको बताया कि उसके बड़े भैया और भाभी तथा मम्मी-पापा और छोटे से भतीजे के साथ रहती है। छोटे भैया बाहर रहते हैं जो कि एक ऊंचे ओहदे पर हैं। बड़े भैया टीचर और पापा भी सरकारी कर्मचारी हैं।
-'कब मिल रहे हो?' स्नेहा ने अमिताभ से प्रश्न किया।
-'जब कहिए..... कल ही।'
-'ओहो! बड़ी बेताबी है तो कहा क्यों नहीं?'
अमिताभ चुप था।
-'बुद्धू कहीं के.... इंस्टा चैट से नंबर और व्हाट्सएप चैट और फिर वीडियो काॅलिंग... अब आगे भी कुछ होना है?'
स्नेहा ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा कल हाफ डे में छूट्टी ले रही हूं..... सीधे घर को निकलूंगी। काॅलेज से मेन रोड की दूरी 300 मीटर है, वहां से मेरा घर 800 मीटर। मेन रोड तक साथ चल कर बातें कर सकते हैं।
-'डन, मिलते हैं कल।'
#क्रमशः
✍️ मोहन
अगले दिन अमिताभ ने कुछ सोच समझकर अपनी बैंगनी वाली शर्ट पहनी और कई दिन से छोड़े हुए स्कूल वाले रास्ते से ऑफिस की तरफ निकल पड़ा। इस बार उसकी चंचल नजरों ने ने खिड़की से लेकर फील्ड का चक्कर सेकेंड्स में लगा लिया। स्नेहा फील्ड में खड़ी थी। दोनों की नजरें मिली, दोनों मुस्कुराए और अमिताभ ऑफिस चला गया।
शाम को उसके फोन पर स्नेहा का मैसेज आया-
'बड़े स्मार्ट लग रहे थे।'
-' देखने वाले की नजरों का कमाल है।' अमिताभ ने एकदम मंझे हुए आशिकों जैसा उत्तर दिया।
ऐसा जवाब सुनकर स्नेहा की आंखें चमक गयीं।
बातों के बीच में स्नेहा ने अमिताभ को बताया कि प्रेरणा इन दोनों के बारे में अभी कुछ नहीं जानती और स्नेहा जानने भी नहीं देना चाहती। स्नेहा कहती है कि प्रेरणा उसकी अच्छी दोस्त है और वह अब भी अमिताभ की तारीफ करती है, अमिताभ को उससे एक अच्छे दोस्त के रूप में बात करनी चाहिए परंतु वह न तो मयंक से उसके संबंधों के बारे में बात करे और न ही अपने व स्नेहा के।
दोनों की बातें ऐसे ही चलती रहीं रहीं चलती रहीं रहीं कि कब दोनों एक दूसरे को समझने को समझने दूसरे को समझने को समझने लगे और बातें आप से तुम पर आ तुम पर आ गईं कि पता ही नहीं चला।
अमिताभ ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को 'बिजनेस सेटिंग' पर कर रखा था जिससे उसका कांटैक्ट दिख रहा था। स्नेहा ने पूछा-' यह तुम्हारा नंबर है?'
-'क्या पता!काॅल कर के देख लो।'
स्नेहा ने नंबर डायल कर दिया। बेल बजती रही, अमिताभ ने जानबूझकर फोन नहीं उठाया।
स्नेहा को भय मिश्रित आश्चर्य हुआ -'आपपर फोन नहीं आया?'
-'नहीं तो।'
-'अरे! फिर ये किसका नंबर है? कहाँ काॅल चली गई, सच-सच क्यों नहीं बता रहे?'
अमिताभ ने एक स्माइली और काॅल लॉग का स्क्रीनशॉट भेजा और फिर दोनों की लाफिंग रिएक्शन का गवाह उनका चैट बाक्स बना।
-'ये मेरा कॉलिंग और व्हाट्सएप नंबर दोनों है।'
अमिताभ को स्नेहा बहुत सुंदर लगती थी, इतनी जल्दी और इस अंदाज में अपना नंबर देने के साथ ही व्हाट्सएप से लेकर काॅलिंग तक की परमीशन मिलने पर अमिताभ के खुशी का ठिकाना न रहा।
फोन काल पर बात करके अमिताभ ने पहली बार स्नेहा की आवाज सुनी। क्या सुरीली आवाज थी!!
मैसेजिंग इंस्टाग्राम के बजाय व्हाट्सएप पर होने लगी थी और एक समय आया जब स्नेहा ने वीडियो काॅल करने को बोला, अमिताभ खुशी के मारे उछल पड़ा।
रात के 12 बजे फेशवाश लगाकर मुंह धुला (मोदी जी के पसीने वाला नुस्खा उस टाइम पब्लिक नहीं था।) और फिर आकर वीडियो काॅलिंग पर लग गया। और फिर यह क्रियाकलाप दैनिक हो गया।
दोनों की लंबी वीडियो चैटिंग चलती नेहा कभी अमिताभ को अपने टेडी परिचय कराती तो कभी अपने छोटे से भतीजे से। उसने अपने परिवार के बारे में भी उसको बताया कि उसके बड़े भैया और भाभी तथा मम्मी-पापा और छोटे से भतीजे के साथ रहती है। छोटे भैया बाहर रहते हैं जो कि एक ऊंचे ओहदे पर हैं। बड़े भैया टीचर और पापा भी सरकारी कर्मचारी हैं।
-'कब मिल रहे हो?' स्नेहा ने अमिताभ से प्रश्न किया।
-'जब कहिए..... कल ही।'
-'ओहो! बड़ी बेताबी है तो कहा क्यों नहीं?'
अमिताभ चुप था।
-'बुद्धू कहीं के.... इंस्टा चैट से नंबर और व्हाट्सएप चैट और फिर वीडियो काॅलिंग... अब आगे भी कुछ होना है?'
स्नेहा ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा कल हाफ डे में छूट्टी ले रही हूं..... सीधे घर को निकलूंगी। काॅलेज से मेन रोड की दूरी 300 मीटर है, वहां से मेरा घर 800 मीटर। मेन रोड तक साथ चल कर बातें कर सकते हैं।
-'डन, मिलते हैं कल।'
#क्रमशः
✍️ मोहन
कहानी दिनों दिन बेहतर होती जा रही🥰🙂 बहुत बढिया
ReplyDeleteThank you very much 😊
DeleteThank you so much 😊
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