कहानी : गांव की रखैल

‌गांव में रखैल

‌लोगों की बातों से तंग आकर मंजीत ने जासूसी करनी चाही, हालांकि वह चाहता तो जान से ज्यादा चाहने वाली बीबी से सीधे पूंछ सकता था परंतु संबंध में कटुता आने का भय जो था।
  मंजीत की आर्थिक स्थिति जैसी थी उसकी अपेक्षा कहीं उसको अधिक सुंदर और सुशील पत्नी मिली थी । विवाह के बाद इन दोनों क बीच का भरोसा भी अटूट था। कहां गांवों में किसी की खूबसूरत बीबी देखी नहीं कि सौ तरीके की बातें शुरु, परंतु इन बातों से मंजीत और उसकी पत्नी तृषा बेखबर रहते। परिस्थितियों ने मंजीत को धनार्जन के लिए प्रवास पर मजबूर कर दिया। मंजीत सहर्ष अपनी बीबी से विदा लेकर विदेश कमाने चला गया।
  इधर इस बात की चर्चा दोपहर को रोज बगीचे में जवानों से लेकर प्रौढ़ सदस्यों वाली सभा में होती कि शंकर मंजीत की घर रोज क्यों जाता है भला। हो न हो कुछ तो गड़बड़ है। परंतु शंकर के अक्खड़ स्वभाव के कारण किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे उससे इस संबंध में कोई बात करें या उसे इस सभा का हिस्सा बना लें।
   खैर जब मंजीत कमाकर वापस लौटा तो उस सभा ने मंजीत को इतना भरा कि उसने जासूसी करने का मन बना लिया।
     मंजीत खिड़की के पास छुपा हुआ है। उधर शंकर आता है, उसके पास छोटे-छोटे सामानों की बहुत सारी पैकेट हैं। एक-एक कर उसने चाकलेट, आमचूर, टाफी, हाजमोला सब बाहर निकाला और आवाज दी '' भाभी! ''
तृषा मुस्कराती हुई किचेन से बाहर आई उसके हाथ में चिमटा यह दिखा रहा है कि वह कुछ बना रही है।
'' आ गए! बहुत दिनों बाद आए इस बार! आओ आज मैंने तुम्हारे लिए आलू के पराठे बनाए हैं। '' फिर
शंकर के लाए हुए सामान को देखकर उसे झपट लेती है। दोनों मुस्करा देते हैं। तृषा कहती है - 'शंकर तुम मेरे पर बड़ा एहसान करते हो, तुम्हें पता है कि लड़कियों को यह सब खाना पसंद होता है परंतु मेरे लिए लाए कौन भैया तो तुम्हारे बाहर रहते हैं।'
आओ अब तुम पराठे खाओ।
   शंकर पराठे खाता गया.. एक.. दो.. तीन.. सात। तृषा उसे मुस्कराते हुए देख रही थी। अचानक शंकर रोने लगा। तृषा झटाक से उठी और उसके आंसू पोंछते हुए बोली फिर रोने लगे तुम आज! क्यों रोते हो आखिर? शंकर सुबकते हुए बताने लगा कि उसे तृषा और पराठों के बीच अपनी मरी हुई मां की याद आती है। मां के मर जाने के बाद न उसे इतना अच्छा खाना कहीं मिलता है और न किसी औरत का इतना ममतामयी साथ। तृषा कहती है तुम रोया न करो मैं हूं न ।वैसे तुम्हारे भैया भी आने वाले हैं, जानते हो? इतना सुनते ही शंकर खड़बड़ा कर उठने को हुआ तो तृषा ने पूंछ लिया कि तुम उनसे इतना दूर क्यों रहते हो आखिर। शंकर ने बताया कि क्योंकि वे उन लोगों के बीच में रहते हैं जो उसे उसकी मां और पिता के बचपन में ही मर जाने के कारण गाली देते हैं।

✍️ मोहन 

Comments

  1. बेहतरीन, सर बहुत अच्छा लिखते है आप🙏🙏

    ReplyDelete
  2. सच में आपने बहुत अच्छा लिखा है, आप इसी तरह लिखते रहें ... आपका बहुत बहुत आभार

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया 🙏

      Delete

Post a Comment

Popular posts from this blog

हास्य-व्यंग्य कहानी : दादा की आफ्टर मैरिज गर्लफ्रेंड

विभीषण

ट्यूशन