लघुकथा : बीएए(ब्रदर अमेंडमेंट ऐक्ट)

#लघुकथा

बीएए (ब्रदर अमेंडमेंट ऐक्ट)

ब्रेक की चांव-चांव की आवाज से लंबी गाड़ियों का काफिला यात्रा से वापस आकर रुक गया। विदाई अभिवादन के साथ ही जब बाकी लोग अपने-अपने घर जाने लगे तो बृजेश ने अपने असिस्टेंट को इशारों में सबका हिसाब कर देने को कहा, और आगे बढ़कर  अपने घर का दरवाजा नाॅक किया। गायत्री ने आकर दरवाजा खोला और मुस्कराहट के साथ स्वागत किया। गायत्री को बृजेश के चेहरे से लग रहा था कि वह कुछ फतह करके आया है। 'मुंह हाथ धुल-लीजिए' कहकर गायत्री पोर्च से आधी कटी सब्जी उठाकर किचेन की तरफ जाने लगी कि बृजेश के लिए कुछ नाश्ता तैयार करे। उस ने रोमांटिक अंदाज में पीछे से गायत्री को पकड़ते हुए शिकायती लहजे में कहना शुरु किया कि देखो मैं सत्तारूढ़ राष्ट्रीय पार्टी का नेता हूं और मेरी प्यारी बीबी इस तरह घर के सारे काम करे ये अच्छा नहीं लगता। तुम नौकरानियों को काम करने दिया करो न।
'अजी कहां मैं सारा काम करती हूं, बस भोजन खुद पकाती हूं... आपके लिए भोजन पकाना मुझे अच्छा लगता है।
'अच्छा - अच्छा! लेकिन अब आज रहने भी दो, सविता बना लेगी खाना।'कहते हुए वो गायत्री को पकड़े-पकड़े पोर्च तक चला आया। सोफे पर दोनों बैठ गए। सामने टेलीविजन पर जोर-जोर से न्यूज आ रही थी... 'सीएए के समर्थन में भाजपा की ताबड़तोड़ रैलियां...।'
    बृजेश ने अपनी बात आगे बढ़ाई, जानती हो गायत्री! हमारी सरकार ने कितना अच्छा कदम उठाया है, अब मुस्लिम देशों में प्रताड़ित हमारे हिंदू भाई हमारे देश में आकर हमलोगों के बीच रह सकेंगे। आज की रैली में जनता को हम सब यही समझाने भी गए थे।
गायत्री कुछ कहती तब तक दरवाजे पर फिरसे नॉक हुई। बाहर से वकील साहब अंदर आए, उन्होंने बृजेश को बताया कि वह अपने पूरे फार्म हाउस का मालिक है। राजेश (बृजेश का सगा भाई) के पैतृक हिस्से की दावेदारी को वकील साहब ने अपने बौद्धिक कौशल से निरस्त करवा दिया है। राजेश अपने कुल जमा बोरिया-बिस्तर और बीबी के साथ बाहर कमाने जा रहा है। बृजेश खुश होकर वकील को फीस दे रहा है, गायत्री कभी वकील को देखती है और कभी बृजेश को।

✍️ मोहन

Comments

Popular posts from this blog

हास्य-व्यंग्य कहानी : दादा की आफ्टर मैरिज गर्लफ्रेंड

विभीषण

ट्यूशन